मां की सेवा जिसने की,
जन्नत को उसने पाया है,
रुला वो एक दिन,
जिसने मां को रुलाया है,
माया माया करने वाले,
मां से उत्तम कौन सी माया है,
ऋषियों, देवों ने भी पूजा मां को,
मैंने भी खुदा के तख्त बिठाया है,
नौ माह गर्भ में रखा,
जनन पीड़ा झेली,
और मुझको जगत दिखलाया है,
क्यूं न पूजें मां को,
इस मां के चलते
मैंने ये रुतबा पाया है,
Monday, May 19, 2008
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4 comments:
अच्छा विचार है। हमेशा माँ की सेवा करते रहना।
हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, आप हिन्दी में बढ़िया लिखें और खूब लिखें यही उम्मीद है।
एक अनुरोध है कृपया यह वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें, यह टिप्पणी करते समय बड़ा परेशान करता है।
॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल
bahut khubsurat rachnaa.
सबकुछ बहुत उम्दा. लिखते रहिये. और भी अच्छा लिखे, कामना करते हैं. शुभकामनायें.
good going, Keep it up. Ajay Kumar
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